उज्जैनः विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में दिल्ली के तीन श्रद्धालुओं से भस्म आरती (Bhasma Aarti) के नाम पर छह हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि प्रोटोकॉल के मुताबिक भस्म आरती की अनुमति उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, संभागायुक्त और उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. संजय गोयल के नाम पर ली गई थी और निर्धारित शुल्क से 10 गुना ज्यादा यानी छह हजार रुपए वसूले गए थे। दिल्ली के तीन भक्तों से एकत्र किया गया। मामला सामने आने के बाद उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
जुटाई जा रही जानकारी
मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली के श्रद्धालुओं से धोखाधड़ी का मामला उनके संज्ञान में आया है। आगंतुकों ने एक स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से प्रोटोकॉल कोटा के तहत भस्म आरती की अनुमति प्राप्त की थी। यह अनुमति उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के नाम से दी गई है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि भस्म आरती की अनुमति के लिए श्रद्धालुओं ने जिन लोगों से संपर्क किया था, उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क कर अनुमति ले ली है। मामले की जांच के लिए मंदिर प्रशासन सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहा है। तो हमारा लक्ष्य आखिरी कड़ी तक पहुंचना है। संदेह के आधार पर करीब आठ लोगों से पूछताछ जारी है। जल्द ही मामले का पटाक्षेप कर दोषी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी।
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समिति आवंटित करती है कोटा
गौरतलब है कि महाकाल मंदिर में भस्म आरती की अनुमति के लिए कोटा सिस्टम लागू है। मंदिर समिति ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों, सांसदों, विधायकों, अन्य राजनेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों और मंदिर के पुजारियों को कोटा आवंटित किया है। इन लोगों की सिफारिश पर ही किसी भी व्यक्ति को अनुमति जारी की जाती है। मंदिर समिति इस व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं रख पा रही है। मंदिर के आसपास घूमने वाले दलाल वीआईपी मंजूरी पाने वाले लोगों से जुड़े हुए हैं। इससे इन लोगों को आसानी से अनुमति मिल जाती है।
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